Sunday, November 11, 2018

Deokund dham devkund mandir aurangabad देवकुण्ड धाम देवकुण्ड सुर्य मंदिर औरंगाबाद बिहार

Deokund dham devkund mandir aurangabad
Deokund dham devkund mandir aurangabad 
Deokund dham devkund mandir aurangabad देवकुण्ड धाम देवकुण्ड सुर्य मंदिर औरंगाबाद बिहार

Saturday, October 27, 2018

जिला में खुला पहला लाइट का कारखाना जिसमे काम सिर्फ महिलाओं को ही मिलेगा


आईआईटी मुंबई की तकनीक से कराया जा रहा निर्माण प्रतिनिधि : अंबा आईआईटी मुंबई की तकनीक से कुडंबा में स्टडी लैंप का निर्माण शुरू किया गया है . शनिवार को बीडीओ लोकप्रकाश , सीओ अनिल कुमार , जीविका के बीपीएम योगेंद्र कुमार अबष्ट व मुखिया कुमारी सावित्री सिंह ने संयुक्त रूप से निर्माण सेंटर का उद्घाटन किया बीडीओ ने कहा कि भारत सरकार के नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय व आईआईटी मुंबई के द्वारा लैंप का निर्माण कराया जा रहा है . इसमें जीविका से जुड़ी महिलाओं को लगाया गया है . उन्होंने कहा कि लैंप सरकारी संस्थानों में पढ़नेवाली छात्राओं को अनुदानित दर पर दिया जायेगा . बीपीएम ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के लिए यह लैंप कारगर साबित होगा . निर्माण का जिम्मा जय बजरंग महिला संगठन की महिलाओं को दिया गया है . इस मौके पर सेंटर इंचार्ज रश्मि कुमारी डाटाइंट्री ऑपरेटर राजू रंजन हेडमास्टर चंद्रशेखर प्रसाद साहू मुखिया प्रतिनिधि विनोद मेहता , बीआरपी अवधेश प्रसाद , मंसूर आलम वार्ड सदस्य बैजनाथ मेहता समेत जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं थीं . 

लगातार पांच घंटे तक जलने की है क्षमता स्टडी लैंप की विशेषता बताते हुए टेक्निकल असिस्टेंट नीरज तिवारी ने कहा कि लैप में सोलर प्लेट लगा हुआ है . एक बार चार्ज होने पर यह चार से पांच घंटे तक जल सकता है . इसके लिए अलग से बैट्री व चार्जर लगाने की जरूरत नहीं है . पांच से छह घंटा धूप में रखने से लैप पूरी तरह चार्ज होगा . उन्होंने कहा कि कि केंद्र सरकार के सौर्य ऊर्जा मंत्रालय व बिहार के जीविका समूह के द्वारा यह योजना तय की गयी . जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं आईआईटी मुंबई की तकनीक से इसका निर्माण करेंगी . हों मात्र 100 रुपये टेक्नीकल असिस्टेंट ने बताया कि स्टडी लैंप के निर्माण में 700 रुपये खर्च है , पर बच्चों से मात्र 100 रुपये लिया जायेगा शेष 600 रुपये नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय वहन करेगा . इस योजना के तहत बच्चों को सस्ते दर पर लैंप उपलब्ध होने से सहूलियत होगी . 800 रुपये देगी सरकार , बच्चों को देने 

40 हजार लैंप बना कट स्कूली बच्चों में वितरण का लक्ष्य जीविका समूह की महिलाओं द्वारा 40 हजार लैंप निर्माण कराने का लक्ष्य रखा गया है . कम्यूनिकेशन मैनेजर राजीव रंजन ने कहा कि इस कार्य में सहायता समूह से जुड़ी 33 महिलाओं को लगाया गया है . लैंप बनाने से लेकर इसे स्कूलों में जाकर बेचने तक का जिम्मा महिलाओं को ही दिया गया है . 2 महिलाएं लैंप का निर्माण करेगी तथा 21 महिलाएं गांव के स्कूलों में जाकर बेचेंगी . काम से जुड़ी महिलाओं को इसके लिए पारिश्रमिक दिया जायेगा लैंप निर्माण के लिए महिलाओं को 12रुपये दिया जाना है स्कूल में जाकर बच्चों के बीच बेचने पर उन्हें 12 रुपये प्रति लैंप के दर से दिया जायेगा . इसके अतिरिक्त बेचनेवाली महिलाओं को पांच रुपये यात्राभता के रूप में दिया जायेगा यदि समूह से जुड़ी महिलाएं एक लैंप बेचती हैं , तो उन्हें 17 रुपये मिलेंगे लैंप में किसी तरह की तकनीकी खराबी होने पर अगस्त 2019 तक इसकी मरम्मत कंपनी द्वारा किया जायेगा . 

Friday, October 26, 2018

Umga sun temple umga aurangabad उमगा सूर्य मंदिर उमगा औरंगाबाद

Umga sun temple aurangabad bihar
Umga sun temple उमगा सूर्य मंदिर
बिहार के औरंगाबाद वास्तव में कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है जिन्हें सायद उतना लोगो तक प्रसार नही किया गया जितना जरूरी थी। औरंगाबाद में ऐसे कई धार्मिक स्थल है जहाँ सालो भर यहाँ सर्द्धालु मन्नत लेके आते है या घूमने आते है जैसे काफी ऐतिहासिक देव सूर्य मंदिर या देवकुण्ड धाम या मुस्लिम धर्म के मानने वालों अमझर शरीफ में बाबा सैयदना दादा का मजार। ये सब धार्मिक स्थलों को कोई पहचान की जरूरत नही है। 

मगर इन्ही में से प्राचीन उमगा में सूर्य मंदिर भी है जो सायद ही काफी लोगो को मालूम होगा। अधिकतर लोग इस मंदिर का प्राचीन इतिहास नही जानते है साथ ही इस मंदिर की किया खासियत है इससे भी अपडेट नही है तो आइए जानते है इस प्राचीन सूर्य मंदिर के बारे में ।

दरसल ये प्राचीन सूर्य मंदिर जो उमगा में है औरंगाबाद  जिला मुख्‍यालय से 27 कि0‍मी0 की दूरी पर अवस्थित है और  ग्रैण्‍ड ट्रंक रोड जिसे अधिकतर लोग( जीटी रोड के नाम से भी जानते है) से 1.5 कि0मी0 दक्षिण की ओर एवं देव सूर्य मंदिर से से 12कि0मी0 की दूरी पर स्थित है जो कि औरंगाबाद जिले और  बिहार राज्य की सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरों में से एक है।

वैसे बताना चाहूंगा कि  19वीं एवं 20वीं शताब्‍दी के प्रायः सभी नामचिन पुरातत्ववेताओं ने यहॉ के मंदिर श्रृंखलाओं का दौर किया था और सर्वेक्षण भी किया तथा उसे अपने सर्वेक्षण प्रतिवेदन में महत्‍वपूर्ण स्‍थान दिया है  आपको मालूम है  मेजर किट्टो ने सन् 1847ई0 श्री कनिंघम ने 1876ई0 जे0डी0 बेगलर ने 1872 ई0 ब्‍लॉच ने 1902 ई0 में इसका पुरातात्‍विक सर्वेक्षण किया तथा इसे अपने सर्वेक्षण प्रतिवेदनों में महत्‍वपूर्ण स्‍थान दिया था। परंतु इतने सर्वेक्षण के बावजूद भी ये प्रसिद्ध मंदिर नेताओं के उपेक्षा का शिकार है। हालांकि बिहार के वर्तमान में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने इस प्राचीन धरोहर में  यात्रा किया था और यहां आकर माना था कि मदनपुर ब्लॉक के उमगा पर्यटकों के लिये अच्छी जगह है। यहां के पहाड़ियों में ऐसी  हरियाली है  की सब की मन मोह सकता है। और उन्होंने वादा किया था की उमगा को धार्मिक पर्यटकों की सूची में जल्द ही सामिल कर लिया जाएगा।

वैसे उमगा जगह काफी पहाड़ियों वाला है उमगा  के  पहाड़ियों पर कई मंदिर एवं मंदिरों के अवशेष मिलाकर मंदिर ऋखला है इसकी पश्चिमी ढलान पर पूर्वाभिमुख वृहद मंदिर है जो देव मंदिर के ही समरूप है (इसकी लम्‍बाई 68.60फीट x 53 फीट एवं उचॉई 60 फीट) गर्भगृह के अतिरिक्‍त यहॉ भी मण्‍डप है जो सुडौल एकाश्‍मक स्‍तम्‍भों के सहारे है।  मंदिर में आप जैसे ही प्रवेश आप करेंगे तो  प्रवेश करने के बाद द्वार के बांयी तरफ एक शिवलिंग एवं भगवान गणेश की मूर्ति भी है। गर्भगृह में भगवान सूर्य की मूर्ति है मंदिर के दाहिने तरफ एक वृहद शिलालेख है सभी मूर्तियां एवं शिलालेख काले पत्‍थर से बने है जो पालका‍लीन मूर्ति कला के उत्कृष्‍ट नमूने है मेजर किट्टो जो यहां भारतीय पुरातत्व विभाग के टीम में पहले व्यक्ति थे जो यहां अध्ययन करने को आये थे उन्होंने यहॉ के शिलालेख का काफी गहराई से  अध्‍ययन किया था काफी अध्यन करने के बाद उसका अनुवाद अपने सर्वेक्षण प्रतिवेदन में दिया है


मेजर किट्टो के अध्ययन के अनुसार
 इस अभिलेख में उमगा के स्‍थानीय शासकप्रमुख की वंशावली है जो अपने को चन्‍द्रवंशी यां सोमवंशी कहते थे इस वंशावली की शुरूआत भूमिपास से प्रारम्‍भ होकर भैरवेन्‍द्र तक आती थी। मंदिर की स्थापना किस ने की ऐसे में कई लोग ने अलग अलग रे देते है लेकि पुरातत्व विभाग के अनुसार  राजा भैरवेन्‍द्र ने ही इस मंदिर की स्‍थापना की थी इनके द्वारा मंदिर में कृष्‍ण बलभद्र एवं सुभद्रा की मूर्तियां स्‍थापित करने का उल्‍लेख है

इस मुख्‍य मंदिर के अतिरिक्‍त उमगा पहाड पर कई मंदिर जिनमें प्रमुख सहस्‍त्र शिवलिंग एवं ध्‍वंस शिवमंदिर है उमगा पहाड की श्रृंखालाओं पर मंदिर  निर्माण  की कला एवं तकनीक का भी अध्‍ययन किया जा सकता है उमगा के मंदिरों का निर्माण यहॉ के स्‍थानीय पत्‍थरों से ही किया गया था।



Thursday, October 25, 2018

औरंगाबाद जिला बिहार का ऐतिहासिक जिला aurangabad district one of the historical city of bihar


Aurangabad bihar
औरंगाबाद बिहार Aurangabad bihar

औरंगाबाद बिहार के सबसे ज्यादा आकर्षक शहरों में से एक है। औरंगाबाद शहर विस्तृत ऐतिहासिक घटनाओं की विरासत के मूल से रिसता है। अपने जीवंत अतीत से अपनी आभा और करिश्मे के बल पर यह शहर यहां आने वाले के दिल पर जादू चलाता है।
इस शहर का नाम भारत की आजादी की लड़ाई में व्यापक रूप से योगदान के लिये प्रसिद्ध है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यहां कई साल बिताए। औरंगाबाद आजादी के आंदोलन में एक बड़ी भूमिका निभाने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री श्री सत्येन्द्र नारायण सिंह के पैतृक स्थान होने का गौरव भी रखता है।
औरंगाबाद जिला बिहार के 38 जिलों में से एक जिला है, औरंगाबाद मगध मण्डल का एक जिला है और इसका मुख्यालय औरंगाबाद नगर में ही है।
औरंगाबाद सन्न 1972 ईसवी में गया से अपने विभाजन के बाद एक स्वतंत्र जिला बना था।
इस जिले में 2 उपमंडल है, 11 तहसीलें 2624 गांव, १ लोक सभा और 6 विधान सभा क्षेत्र है।
औरंगाबाद जिले का क्षेत्रफल 3305 वर्ग किलोमीटर है, और २०11 की जनगणना के अनुसार औरंगाबाद की जनसँख्या 25,11,243 और जनसँख्या घनत्व 760 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, औरंगाबाद की साक्षरता 72.77 % है, महिला पुरुष अनुपात यहाँ पर 916 महिलाये प्रति 1000 पुरुषो पर है, जिले की जनसँख्या विकासदर २००1 से २०11 के बीच 24.72 % रहा है।
औरंगाबाद भारत में कहाँ पर है
औरंगाबाद जिला बिहार में है जो की
भारत के राज्यो में पूर्व तरफ है, औरंगाबाद जिला बिहार में दक्षिण पश्चिम की तरफ का जिला है इसकी सीमाएं दक्षिण पश्चिम में झारखण्ड से मिलती है, औरंगाबाद के अक्षांस और देशांतर क्रमशः 24 डिग्री 75  उत्तर से 84 डिग्री 37  पूर्व तक है, औरंगाबाद की समुद्रतल से ऊंचाई 108 मीटर है, औरंगाबाद पटना से 143 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम की तरफ है। और देश की राजधानी दिल्ली से 986 किलोमीटर दक्षिण पूर्व की तरफ  है।
औरंगाबाद के पडोसी जिलें।
औरंगाबाद का पश्चिमोत्तर भाग रोहतास जिले से जुड़ा है, उत्तर पूर्वी किनारा अरवल जिले से जुड़ा है, जबकि दक्षिण पूर्वी भाग
गया जिले से जुड़ा हुआ है, दक्षिण पश्चिम भाग
झारखण्ड के जिले पलामू से जुड़ा है।
औरंगाबाद जिले में कितनी तहसील है?
औरंगाबाद जिले में 11 तहसीलें है इन ११ तहसीलों के नाम 1. औरंगाबाद।  2. बारुन, 3. दाउदनगर, 4. देव,  5. गोह,  6. हँसपुरा, 7. कुटुम्बा,  8. मदनपुर , 9. नबीनगर , 10. ओबरा, 11. रफिगंज है, इन ११ तहसीलों में कुटुम्बा तहसील ग्रामो की संख्या के आधार पर सबसे बड़ी है और दाउदनगर तहसील ग्रामो की संख्या के आधार पर सबसे छोटी तहसील है।
औरंगाबाद जिले में विधान सभा की सीटें।
औरंगाबाद जिले में ६ विधान सभा सीट है, इन ६ विधान सभा क्षेत्रो के नाम इस प्रकार से है गोह, ओबरा, नबीनगर, कुटुम्बा , औरंगाबाद, रफीगंज, भालू खैर ,
औरंगाबाद जिले में कितने गांव है?
औरंगाबाद जिले में 1725 गांव है, जो की जिले की ११ तहसीलों के अंदर है, ग्रामो की संख्या तहसील ने नाम के साथ इस प्रकार से है 1. औरंगाबाद में 157 गांव है, 2. बारुन तहसील में 19० गांव है, 3. दाउदनगर में ६० गांव है, 4. देव तहसील में 115 गांव है, 5. गोह में 158 गांव है, 6. हँसपुरा तहसील में 71 गांव है, 7. कुटुम्बा में २12 गांव है, 8. मदनपुर तहसील में 123  गांव है, 9. नबीनगर में 294 गांव है, 10. ओबरा तहसील में 145 गांव है 11. राफिगंज २10 गांव है।
औरंगाबाद के ब्लॉक।
औरंगाबाद जिले में ११ ब्लॉक है, जिनके नाम मदनपुर, कुटुम्बा, दाउदनगर, औरंगाबाद, बारुन, ओबरा, देव, नबीनगर, हँसपुरा, गोह और रफीगंज है।
औरंगाबाद तक कैसे पहुंचे?
यहां आने वाले पर्यटक प्रमुख विकल्पों में से कोई भी चुन सकते हैं। औरंगाबाद को परिवहन के सभी साधनों के तहत अच्छी बुनियादी सुविधाएं प्राप्त हैं। जगह अच्छी तरह से सड़कों के माध्यम से जुड़ी हुई है और परिवहन के बहुत अच्छे साधनों ने औरंगाबाद के पर्यटन के क्षेत्र में मुख्य रूप से सुधार में मदद की है। यह अच्छी तरह से राष्ट्रीय राजमाग 2 और राष्ट्रीय राजमार्ग 98 से जुड़ा हुआ है।
औरंगाबाद मौसम।
औरंगाबाद का जलवायु उष्णकटिबंधीय है, ग्रीष्मकाल बहुत गर्म और सर्दियां औसत की तुलना में बहुत ठंडी होती हैं। औरंगाबाद की जलवायु क्षेत्र में बहने वाली पूर्वी हवाओं से प्रभावित है। यहाँ पतझर वन पाया जाता है।